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Showing posts from August, 2026

“सुभाष चंद्रा बनाम मुकेश अंबानी: Zee विवाद से NCLT तक, आखिर क्यों आमने-सामने आए दो दिग्गज?”

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सुभाष चंद्रा बनाम मुकेश अंबानी: आखिर ऐसा क्या हुआ कि Zee के संस्थापक को सोशल मीडिया पर सामने आना पड़ा? ₹22,006 करोड़ के दावों से लेकर ₹6.5 करोड़ के NCLT Resolution Plan और पुराने Zee–Invesco विवाद तक—पूरे मामले का विश्लेषण विशेष विश्लेषण | Political & Corporate Analyst — HR Pandey भूमिका भारतीय मीडिया और कॉरपोरेट जगत में एक बार फिर दो बड़े नाम चर्चा के केंद्र में हैं— Zee के संस्थापक सुभाष चंद्रा और Reliance Industries के चेयरमैन मुकेश अंबानी। मामला तब सार्वजनिक बहस का विषय बना, जब सुभाष चंद्रा ने सोशल मीडिया के माध्यम से मुकेश अंबानी को सीधे संबोधित करते हुए Reliance से जुड़े मीडिया संस्थानों की रिपोर्टिंग पर गंभीर सवाल उठाए। चंद्रा ने आरोप लगाया कि उनके व्यक्तिगत insolvency मामले को लेकर उनके खिलाफ गलत नैरेटिव बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, Reliance ने इन आरोपों को “baseless” यानी निराधार बताते हुए पूरी तरह खारिज किया और कहा कि उसके मीडिया ब्रांडों का इस्तेमाल कभी किसी व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए नहीं किया गया और न किया जाएगा। इसलिए इस पूरे विवाद को केवल दो उद...

“₹390 करोड़ के नए प्रशासनिक भवन के बाद फिर विस्तार की तैयारी: नोएडा प्राधिकरण की योजना पर उठे बड़े सवाल”

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नोएडा प्राधिकरण के नए प्रशासनिक भवन पर बड़ा सवाल: उद्घाटन के दो महीने बाद ही विस्तार की तैयारी क्यों? लगभग ₹390 करोड़ की परियोजना के बाद अतिरिक्त निर्माण की जरूरत ने खड़े किए योजना, डिजाइन और जवाबदेही से जुड़े सवाल Political Analyst | HR Pandey नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-96 स्थित मुख्य प्रशासनिक भवन को लेकर एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 28 जून 2026 को उद्घाटित किए गए इस प्रशासनिक परिसर में अब अतिरिक्त निर्माण की तैयारी की जा रही है। आगामी बोर्ड बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव रखे जाने की बात कही जा रही है। पहली नजर में यह एक सामान्य प्रशासनिक विस्तार का मामला लग सकता है, लेकिन जब बात लगभग ₹390 करोड़ की लागत से तैयार हुए नए प्रशासनिक भवन की हो और उद्घाटन के महज कुछ समय बाद ही अतिरिक्त स्थान की आवश्यकता सामने आए, तो कई महत्वपूर्ण सवाल स्वाभाविक रूप से उठते हैं। आखिर मामला क्या है? उपलब्ध जानकारी के अनुसार नोएडा प्राधिकरण के मुख्य प्रशासनिक भवन परिसर में सभी विभागों को समायोजित करने के लिए अतिरिक्त स्थान की आवश्यकता महसूस की जा रही है।...

👉 “दो बार मुख्यमंत्री, खाते में सिर्फ ₹566! कौन थे ये महान नेता?”

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₹566 वाला मुख्यमंत्री: जब सत्ता के बाद भी नहीं बदली सादगी क्या आपने कभी सुना है कि कोई व्यक्ति दो बार मुख्यमंत्री रहा हो… और उसके निधन के बाद उसके बैंक खाते में सिर्फ ₹566 होने का दावा किया गया हो? आज जब राजनीति में सत्ता के साथ संपत्ति, सुविधाओं और वैभव को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं, तब इतिहास के पन्नों में एक ऐसा नाम भी दर्ज है, जो सादगी और ईमानदारी की मिसाल के रूप में याद किया जाता है। यह कहानी है पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. प्रफुल्ल चंद्र घोष की। डॉ. घोष केवल राजनेता नहीं थे। वे वैज्ञानिक, स्वतंत्रता सेनानी और महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित सार्वजनिक जीवन के व्यक्ति थे। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में दो अलग-अलग अवधियों में राज्य का नेतृत्व किया। वे पहली बार 1947 में मुख्यमंत्री बने और बाद में 1967 में संयुक्त मोर्चा सरकार के दौरान फिर इस पद पर पहुंचे। इसलिए उनके बारे में “दो बार मुख्यमंत्री” कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, वे दो बार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे । लेकिन सत्ता...

🇮🇳 “जनमत भारत: एक नई सोच, एक नई शुरुआत” “सच की खोज… समाज के लिए | Coming Soon”

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🎙️ जनमत भारत — Coming Soon  क्या आप उन खबरों से थक चुके हैं… जहाँ शोर बहुत है, लेकिन सच कहीं पीछे छूट जाता है? क्या आप इंतज़ार कर रहे हैं ऐसे मंच का… जहाँ सवाल भी होंगे, जवाब भी होंगे और मुद्दों की गहराई से पड़ताल भी? तो आपका इंतज़ार अब जल्द खत्म होने वाला है... आ रहा है — जनमत भारत | RESEARCH MEDIA एक ऐसा मंच, जहाँ खबर सिर्फ दिखाई नहीं जाएगी… खबर के पीछे की सच्चाई को समझने की कोशिश की जाएगी। जहाँ होगा— रिसर्च बेस्ड न्यूज़, तथ्य आधारित विश्लेषण और जनता की राय। राजनीति हो या समाज, नीति हो या जनहित का मुद्दा, स्थानीय सवाल हों या देश के बड़े विषय— हर मुद्दे को देखेंगे एक अलग नजरिए से। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है— न किसी के पक्ष में, न किसी के दबाव में... सवाल वही, जो जरूरी हैं। विश्लेषण वही, जो तथ्यों पर आधारित हो। और आवाज़ वही, जो जनता के बीच से आती हो। जनमत भारत — सिर्फ एक मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि सवाल पूछने और सच्चाई समझने की एक नई कोशिश है। और इस नई शुरुआत के साथ आपके सामने होंगे HR PANDEY — Political Analyst जहाँ राजनीति पर होगी बेबाक चर्चा...

“अंकित बालियान हत्याकांड: गोली चलाने वालों से लेकर साजिश के मास्टरमाइंड तक कब पहुँचेगा कानून?”

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विशेष विश्लेषण रिपोर्ट अंकित बालियान हत्याकांड: दिनदहाड़े गोलियों से हत्या ने खड़े किए कानून-व्यवस्था और संगठित अपराध पर गंभीर सवाल स्थान: शामली, उत्तर प्रदेश मृतक: अंकित बालियान — हरियाणवी गायक एवं यूट्यूबर रिपोर्ट: Live India News24 विशेष विश्लेषण: Harsh Raj Pandey, Editor-in-Chief 1. घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया हरियाणवी गायक एवं यूट्यूबर अंकित बालियान की शामली में जिम से बाहर निकलते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार हमलावर दो मोटरसाइकिलों पर आए थे और चार हमलावरों द्वारा फायरिंग किए जाने की बात सामने आई है। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया और परिवार एवं स्थानीय लोगों ने विरोध जताया। पोस्टमार्टम से संबंधित रिपोर्टों में शरीर पर कई गोली लगने की बात सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में नौ गोलियां लगने का उल्लेख है। 2. सबसे बड़ा सवाल — हत्या के पीछे कौन? इस समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी व्यक्ति को बिना पुलिस जांच और न्यायिक पुष्टि के हत्यारा घोषित नहीं किया जा सकता। हालांकि मामले में एक गंभीर सुराग सामने आया है। मीडिया रिप...

“राखी का धागा, रिश्तों का वादा: रक्षाबंधन से सामाजिक जिम्मेदारी तक”

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🇮🇳 रक्षाबंधन विशेष विश्लेषण रिश्तों की डोर से सामाजिक जिम्मेदारी तक—रक्षाबंधन का बदलता स्वरूप विशेष रिपोर्ट | Live India News24 विश्लेषक: हर्ष राज पाण्डेय Editor-in-Chief, Live India News24 📌 भूमिका रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने और उपहार देने का पर्व नहीं है। यह भारतीय संस्कृति में विश्वास, स्नेह, जिम्मेदारी और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती का प्रतीक है। बदलते समय के साथ इस पर्व का स्वरूप भी बदल रहा है, लेकिन इसकी मूल भावना आज भी वही है—एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहना। 🪢 राखी से आगे बढ़ती भावना परंपरागत रूप से रक्षाबंधन को भाई-बहन के रिश्ते से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन आधुनिक समाज में इसका संदेश और व्यापक हो गया है। आज राखी का अर्थ केवल यह नहीं कि भाई अपनी बहन की रक्षा करेगा, बल्कि यह भी है कि परिवार में बेटियों को समान सम्मान, सुरक्षा और अवसर मिलें। वहीं बहन का प्रेम भी केवल राखी तक सीमित नहीं है। यह रिश्ते की उस भावनात्मक शक्ति का प्रतीक है जो जीवन के कठिन दौर में परिवार को जोड़कर रखती है। 🇮🇳 सामाजिक दृष्टि से महत्व रक्षाबंधन हमें यह स...

“लखनऊ ट्रैफिक अलर्ट: टिकैतगंज–मीना बेकरी में रोज़ का जाम, अब स्थायी समाधान की दरकार”

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🚨 लखनऊ का ट्रैफिक अलर्ट टिकैतगंज–बुलाके अड्डा–मीना बेकरी चौराहा: रोज के जाम से जनता बेहाल, अब स्थायी समाधान जरूरी पुलिस के प्रयास के बावजूद हालात जस के तस—व्यवस्था में बदलाव नहीं हुआ तो बढ़ सकती है समस्या लखनऊ। राजधानी के टिकैतगंज, बुलाके अड्डा और मीना बेकरी चौराहे के आसपास यातायात व्यवस्था लगातार चुनौती बनी हुई है। सड़क पर बेतरतीब पार्किंग, ठेले-खोमचे, संकरी सड़क और बढ़ते वाहन दबाव के कारण जाम की स्थिति बन रही है। स्थिति का गंभीर पहलू यह है कि मौके पर पुलिसकर्मी यातायात नियंत्रित करने और जाम खुलवाने का प्रयास करते हैं, लेकिन मूल कारणों पर स्थायी कार्रवाई नहीं होने से समस्या बार-बार सामने आ रही है। पुलिस सड़क पर, लेकिन समाधान व्यवस्था में चाहिए टिकैतगंज चौकी इंचार्ज अपनी टीम के साथ यातायात व्यवस्था संभालने का प्रयास करते हैं। इसके बावजूद बुलाके अड्डा से मोहान जाने वाले मार्ग पर गलत पार्किंग और सड़क के किनारे अव्यवस्थित गतिविधियों के कारण यातायात की रफ्तार प्रभावित होती है। यह स्थिति यह संकेत देती है कि समस्या केवल ट्रैफिक पुलिस की नहीं है। यह ट्रैफिक प्लानिंग, प...

“UP 2027: BJP विरोध से आगे की लड़ाई—योगी, हिंदुत्व और हिंदू एकता के बीच किसका नैरेटिव भारी?”

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UP 2027: BJP के विरोध, हिंदू एकता और ‘योगी हटाओ’ नैरेटिव पर राजनीतिक विश्लेषण विश्लेषक: हर्ष राज पाण्डेय Editor-in-Chief, Live India News24 राष्ट्रीय मुख्य महासचिव, अखिल भारतीय पत्रकार एसोसिएशन भूमिका उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 जैसे-जैसे करीब आ रहा है, प्रदेश की राजनीति में केवल सरकार बनाम विपक्ष की लड़ाई नहीं, बल्कि नैरेटिव, सामाजिक समीकरण, नेतृत्व और मतदाता ध्रुवीकरण की लड़ाई भी तेज होती दिखाई दे रही है। वर्तमान राजनीतिक विमर्श में एक तरफ भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने शासन, कानून-व्यवस्था, विकास और हिंदुत्व के मुद्दों के आधार पर चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं विपक्ष BJP सरकार के खिलाफ सत्ता-विरोधी भावना, सामाजिक समीकरण और शासन से जुड़े सवालों को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। अगस्त 2026 में BJP ने उत्तर प्रदेश समेत 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने उत्तर प्रदेश के लिए नए संगठनात्मक प्रभारी भी नियुक्त किए हैं। इसी पृष्ठभूमि में यह सवाल महत्वपूर्ण...

“UGC खत्म होगा या बदलेगा? सरकार के बड़े शिक्षा सुधार का पूरा सच”

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UGC पर बड़ा बदलाव: सरकार का फैसला क्या है? खत्म होगा UGC या बदलेगा पूरा उच्च शिक्षा नियमन तंत्र? विशेष विश्लेषण रिपोर्ट राजनीतिक विश्लेषक: हर्ष राज पांडेय Editor-in-Chief – Live India News24 राष्ट्रीय महासचिव – अखिल भारतीय पत्रकार एसोसिएशन भूमिका भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े संस्थागत बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। केंद्र सरकार ने Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill, 2025 संसद में पेश किया है, जिसके जरिए मौजूदा University Grants Commission (UGC), AICTE और NCTE को एक नए व्यापक नियामक ढांचे में समाहित करने का प्रस्ताव है। हालांकि यह समझना बेहद जरूरी है कि यह अभी कानून नहीं बना है और UGC को तत्काल समाप्त नहीं किया गया है। यह विधेयक 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश हुआ और 16 दिसंबर 2025 को संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया। 25 अगस्त 2026 तक समिति इस विधेयक पर विशेषज्ञों और हितधारकों के विचार सुन रही थी। इसलिए वर्तमान स्थिति को “UGC खत्म हो गया” कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। 1. सरकार वास्तव में क्या बदलना चाहती है? सरकार का प्रस्ताव है कि उच्च शिक्...

“SP समाजवादियों का इरादा क्या है? 2027 में विकास या बदले की राजनीति”

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एसपी कार्यकर्ता के “चुन-चुनकर बदला लेंगे” वाले बयान पर सियासी सवाल: क्या 2027 की राजनीति विकास बनाम प्रतिशोध के मुद्दे पर जाएगी? विशेष राजनीतिक विश्लेषण विश्लेषक: हर्ष राज पांडेय Editor-in-Chief – Live India News24 राष्ट्रीय महासचिव – अखिल भारतीय पत्रकार एसोसिएशन भूमिका उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, प्रदेश की राजनीति में सत्ता, विपक्ष, विकास, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के साथ-साथ “बदले की राजनीति” जैसे मुद्दे भी चर्चा में आने लगे हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में समाजवादी पार्टी से जुड़े एक कार्यकर्ता को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा रहा है कि यदि सरकार सत्ता में आती है तो “चुन-चुनकर बदला लिया जाएगा।” वीडियो में यह बयान अखिलेश यादव के कार्यकर्ता से जुड़ा हुआ है, जिसके आधार पर समाजवादी पार्टी की राजनीतिक भाषा और संभावित मंशा पर सवाल उठाया जा सकता हैं। हालांकि, इस वीडियो की वास्तविकता, वक्ता की पहचान और पूरे संदर्भ की पुष्टि के लिए मूल वीडियो तथा संबंधित बयान को देखना आवश्यक है। इसलिए इस रिपोर्ट में इसे वीडियो ...

“राम रहीम को बार-बार पैरोल क्यों? कानून, सत्ता और सियासत के बीच बड़ा सवाल”

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राम रहीम को बार-बार पैरोल/फरलो क्यों? कानून, राजनीति और सत्ता के समीकरण का विश्लेषण Political Analyse — Harsh Raj Pandey भूमिका डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर जेल से बाहर हैं। 25 अगस्त 2026 को रोहतक की सुनारिया जेल से उन्हें 21 दिन की फरलो मिली। यह 2017 में बलात्कार के मामलों में दोषसिद्धि के बाद उनकी 17वीं अस्थायी रिहाई है। इससे पहले 2026 में जनवरी में 40 दिन और मई में 30 दिन की पैरोल मिल चुकी है। इस वर्ष अब तक वे 91 दिन जेल से बाहर रह चुके हैं। राम रहीम को दो महिला अनुयायियों से बलात्कार के मामले में 2017 में दोषी ठहराया गया था और उन्हें 20 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। उनकी अस्थायी रिहाई को लेकर पिछले कई वर्षों से कानूनी, प्रशासनिक और राजनीतिक सवाल उठते रहे हैं। 1. सबसे बड़ा सवाल — आखिर इतनी बार रिहाई कैसे? पहली नजर में यह मामला असाधारण इसलिए लगता है क्योंकि कोई सामान्य कैदी इतनी बार और इतने लंबे अंतराल में जेल से बाहर आता दिखाई नहीं देता। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर समझना जरूरी है। पैरोल सामान्यतः विशेष परिस्थितियों/कानूनी प्रावध...

🚨 लखनऊ का रकाबगंज चौराहा जाम से बेहाल, सब्जी मंडी बनी मुसीबत—ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे सवाल!

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लखनऊ ब्रेकिंग: रकाबगंज चौराहा जाम से बेहाल, सब्जी मंडी बनी मुसीबत लखनऊ | थाना वजीरगंज राजधानी लखनऊ के रकाबगंज चौराहे पर मंगलवार को भीषण जाम की स्थिति देखने को मिली। सब्जी मंडी के आसपास सड़क पर बढ़ते यातायात दबाव और अव्यवस्थित आवागमन के कारण पांडेयगंज से सिटी स्टेशन की ओर जाने वाला मार्ग बुरी तरह प्रभावित रहा। स्थानीय लोगों और राहगीरों के मुताबिक, चौराहे पर काफी देर तक यातायात व्यवस्था संभालने के लिए पर्याप्त पुलिसकर्मी नजर नहीं आए, जिसके चलते वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जाम की वजह से राहगीरों को कुछ ही दूरी तय करने में काफी समय लग रहा था। राजधानी के व्यस्ततम इलाकों में शामिल रकाबगंज चौराहे पर यातायात व्यवस्था का इस तरह प्रभावित होना ट्रैफिक मैनेजमेंट पर सवाल खड़े करता है। खासकर सब्जी मंडी के आसपास पीक आवर्स में ट्रैफिक नियंत्रण और पार्किंग व्यवस्था को लेकर प्रभावी इंतजाम की जरूरत दिखाई देती है। सवाल DCP ट्रैफिक से DCP ट्रैफिक रवीना त्यागी जी से सवाल है— क्या रकाबगंज, पांडेयगंज और आसपास के व्यस्त बाजार क्षेत्रों के लिए कोई स्थायी ट्रैफिक मैनेजम...

“युवाओं की आवाज़ बुलंद करने की तैयारी, आर्य वीर पार्टी ने गठित की सोशल मीडिया सेल”

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आर्य वीर पार्टी की तीन सदस्यीय सोशल मीडिया इकाई गठित युवा नीति, जातिगत आरक्षण और UGC-2026 की वापसी के लिए संघर्ष का निर्णय नई दिल्ली। आर्य वीर पार्टी की जेसी होटल में आयोजित बैठक में युवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में देश के युवाओं में बढ़ती निराशा और हताशा को दूर करने, उनके आत्मविश्वास को मजबूत करने तथा उन्हें सम्मानजनक अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी युवा नीति की आवश्यकता पर जोर दिया गया। बैठक में पार्टी ने जातिगत आरक्षण व्यवस्था तथा UGC-2026 को वापस लेने की मांग को लेकर संघर्ष आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। पार्टी नेताओं ने कहा कि युवाओं के भविष्य, समान अवसर और प्रतिभा के आधार पर आगे बढ़ने के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा। पार्टी की सोशल मीडिया गतिविधियों को अधिक प्रभावी, संगठित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए तीन सदस्यीय सोशल मीडिया सेल का गठन किया गया। इसमें कम्प्यूटर इंजीनियर आनंद चौबे, हर्षित गुरेजा और अरिन्दम मिश्र को जिम्मेदारी सौंपी गई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेन्द्र मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित ...

आर्य वीर पार्टी का संकल्प: जातीय विभाजन नहीं, समान अवसर और युवा रोजगार

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आर्य वीर पार्टी, भारत भारत की प्रगति तभी सार्थक होगी, जब सामाजिक न्याय, समान अवसर, रोजगार और सुशासन का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। आर्य वीर पार्टी का विश्वास है कि राजनीति का उद्देश्य समाज में विभाजन पैदा करना नहीं, बल्कि नागरिकों को समान अवसर देकर राष्ट्र को मजबूत बनाना होना चाहिए। आरक्षण का मूल उद्देश्य ऐतिहासिक सामाजिक असमानताओं को कम करना और वंचित वर्गों को आगे बढ़ने का अवसर देना था। समय के साथ देश की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव आया है। इसलिए आरक्षण व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा आवश्यक है, ताकि वास्तविक रूप से जरूरतमंद लोगों तक उसका लाभ पहुंच सके और किसी भी वर्ग के विरुद्ध सामाजिक वैमनस्य को बढ़ावा न मिले। आर्य वीर पार्टी जाति के आधार पर समाज में संघर्ष और राजनीतिक ध्रुवीकरण की राजनीति का विरोध करती है। पार्टी का मानना है कि आर्थिक रूप से कमजोर, साधनहीन और अवसरों से वंचित लोगों को शिक्षा, रोजगार और विकास में प्रभावी सहायता मिलनी चाहिए। पूर्व सैनिकों, दिव्यांगजनों तथा अन्य वास्तविक रूप से वंचित वर्गों के हितों की भी पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित की...

“37 साल बाद बदली गीडा की तस्वीर, अब पूर्वांचल में दिखने लगी औद्योगिक विकास की रफ्तार”

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मेरी गोरखपुर यात्रा (3) 37 वर्षों की धीमी रफ्तार के बाद गीडा में दिखने लगी औद्योगिक विकास की नई तस्वीर विशेष रिपोर्ट | विश्लेषण पूर्वांचल का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले गोरखपुर की पहचान लंबे समय तक धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक केंद्र के रूप में रही। लेकिन औद्योगिक विकास और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के मामले में यह क्षेत्र अपेक्षाओं के अनुरूप गति हासिल नहीं कर पाया। इसी उद्देश्य से लगभग 37 वर्ष पहले गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी गीडा (GIDA) की स्थापना की गई थी। उद्देश्य था—गोरखपुर और आसपास के पिछड़े क्षेत्रों में योजनाबद्ध औद्योगिक विकास, निवेश को आकर्षित करना और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना। लेकिन तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी गीडा की उपलब्धियां लंबे समय तक उस स्तर की नहीं रहीं, जिसकी अपेक्षा एक औद्योगिक विकास प्राधिकरण से की जाती है। अब बदलती दिखाई दे रही है तस्वीर गोरखपुर यात्रा के दौरान गीडा की वर्तमान मुख्य कार्यपालक अधिकारी अनुज मलिक से बातचीत और औद्योगिक क्षेत्र के निरीक्षण से यह संकेत मिला कि गीडा अब अपने पुराने स्वरूप स...