“37 साल बाद बदली गीडा की तस्वीर, अब पूर्वांचल में दिखने लगी औद्योगिक विकास की रफ्तार”
मेरी गोरखपुर यात्रा (3)
37 वर्षों की धीमी रफ्तार के बाद गीडा में दिखने लगी औद्योगिक विकास की नई तस्वीर
विशेष रिपोर्ट | विश्लेषण
पूर्वांचल का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले गोरखपुर की पहचान लंबे समय तक धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक केंद्र के रूप में रही। लेकिन औद्योगिक विकास और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के मामले में यह क्षेत्र अपेक्षाओं के अनुरूप गति हासिल नहीं कर पाया।
इसी उद्देश्य से लगभग 37 वर्ष पहले गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी गीडा (GIDA) की स्थापना की गई थी। उद्देश्य था—गोरखपुर और आसपास के पिछड़े क्षेत्रों में योजनाबद्ध औद्योगिक विकास, निवेश को आकर्षित करना और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना।
लेकिन तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी गीडा की उपलब्धियां लंबे समय तक उस स्तर की नहीं रहीं, जिसकी अपेक्षा एक औद्योगिक विकास प्राधिकरण से की जाती है।
अब बदलती दिखाई दे रही है तस्वीर
गोरखपुर यात्रा के दौरान गीडा की वर्तमान मुख्य कार्यपालक अधिकारी अनुज मलिक से बातचीत और औद्योगिक क्षेत्र के निरीक्षण से यह संकेत मिला कि गीडा अब अपने पुराने स्वरूप से काफी आगे निकलने की कोशिश कर रहा है।
प्राधिकरण के अनुसार लगभग 1,200 औद्योगिक इकाइयों को सक्रिय करने की दिशा में काम चल रहा है। कियान डिस्टिलरी, ज्ञान डेयरी और गैलेंट जैसी इकाइयों के साथ अनेक उद्योग यहां स्थापित हो चुके हैं।
यह बदलाव केवल औद्योगिक इकाइयों की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं है। इसके साथ आवास, संस्थागत ढांचे, सड़क, आधारभूत सुविधाओं और नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिखाई दे रहा है।
न्यू गोरखपुर: उद्योग के साथ आवासीय विस्तार
गीडा का सेक्टर-5, जिसे न्यू गोरखपुर के नाम से जाना जाता है, योजनाबद्ध आवासीय विकास का उदाहरण बनकर सामने आया है।
यहां फ्लैटों और आवासीय भूखंडों पर बने मकानों में बड़ी संख्या में लोग रह रहे हैं। वहीं सेक्टर-7 को संस्थागत क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया है।
इससे स्पष्ट होता है कि गीडा का विकास केवल फैक्ट्री लगाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र के साथ एक व्यापक शहरी ढांचे के निर्माण की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
धुरियापार में बड़ा औद्योगिक विस्तार
गीडा के लिए सबसे महत्वपूर्ण भविष्य की परियोजनाओं में धुरियापार औद्योगिक क्षेत्र को माना जा सकता है।
इन्वेस्ट यूपी के प्रतिनिधि बलराम यादव के अनुसार गीडा मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर धुरियापार क्षेत्र में करीब 5,500 एकड़ भूमि पर नए औद्योगिक गलियारे के विकास की दिशा में काम हो रहा है।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश के पहले प्लास्टिक पार्क और फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स जैसी परियोजनाएं भी गीडा के औद्योगिक विस्तार की नई दिशा को दर्शाती हैं।
यदि इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारा जाता है, तो गीडा आने वाले वर्षों में केवल गोरखपुर ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल की औद्योगिक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
नोएडा और गीडा के बीच अभी भी बड़ा अंतर
हालांकि गीडा की वर्तमान प्रगति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन आंकड़ों की तुलना करें तो अभी भी काफी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
नोएडा में 11 हजार से अधिक, ग्रेटर नोएडा में लगभग साढ़े चार हजार और यीडा क्षेत्र में तीन हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयों की तुलना में गीडा का औद्योगिक आधार अभी काफी छोटा है।
लेकिन यहां तुलना का दूसरा पहलू भी महत्वपूर्ण है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा को दिल्ली-एनसीआर की भौगोलिक निकटता, बेहतर कनेक्टिविटी और दशकों से विकसित औद्योगिक इकोसिस्टम का लाभ मिला है। इसके विपरीत गोरखपुर और पूर्वांचल लंबे समय तक औद्योगिक पिछड़ेपन और रोजगार के सीमित अवसरों से जूझते रहे हैं।
ऐसे में गीडा में औद्योगिक गतिविधियों का तेजी से बढ़ना अपने आप में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
सबसे बड़ा सवाल—क्या रुकेगा पलायन?
पूर्वांचल के औद्योगिक विकास का सबसे बड़ा सामाजिक प्रभाव रोजगार के क्षेत्र में दिखाई दे सकता है।
यदि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त संख्या में उद्योग स्थापित होते हैं, तो गोरखपुर और आसपास के जिलों के युवाओं तथा श्रमिकों को रोजगार के लिए दिल्ली, मुंबई, गुजरात, पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों की ओर जाने की मजबूरी कम हो सकती है।
औद्योगिक विकास का वास्तविक मूल्य केवल निवेश की राशि या फैक्ट्रियों की संख्या से नहीं मापा जाना चाहिए। इसका मूल्यांकन इस आधार पर भी होना चाहिए कि—
- कितने स्थानीय लोगों को रोजगार मिला?
- कितने नए छोटे और मध्यम उद्योग जुड़े?
- स्थानीय कारोबार और परिवहन को कितना लाभ मिला?
- युवाओं के कौशल विकास के कितने अवसर बने?
- कितने परिवारों की आय में स्थायी वृद्धि हुई?
यदि गीडा इन सवालों के सकारात्मक जवाब देने में सफल होता है, तो इसका प्रभाव गोरखपुर की सीमा से बाहर पूरे पूर्वांचल पर पड़ सकता है।
योगी सरकार के लिए गीडा क्यों महत्वपूर्ण है?
गीडा का विकास वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार की पूर्वांचल पर केंद्रित औद्योगिक रणनीति से भी जुड़ा हुआ है।
गीडा की सीईओ अनुज मलिक के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
पूर्वांचल लंबे समय से विकास के मामले में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पीछे रहा है। इसलिए यदि गोरखपुर को एक मजबूत औद्योगिक हब के रूप में विकसित किया जाता है, तो यह क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
विश्लेषण: गीडा के सामने अवसर भी, चुनौतियां भी
गीडा के पास आज सबसे बड़ा अवसर यह है कि पूर्वांचल में उद्योगों के लिए एक नया इकोसिस्टम तैयार किया जा सकता है।
लेकिन इसके लिए केवल जमीन और फैक्ट्री पर्याप्त नहीं होंगी।
उद्योगों को लगातार बिजली, बेहतर सड़क और रेल कनेक्टिविटी, कुशल श्रमिक, लॉजिस्टिक्स, बैंकिंग और वित्तीय सुविधाएं तथा तेजी से प्रशासनिक मंजूरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।
साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बड़े उद्योगों के साथ स्थानीय छोटे और मध्यम उद्यमों को भी सप्लाई चेन में स्थान मिले।
निष्कर्ष
37 वर्षों की यात्रा में गीडा ने निश्चित रूप से अपेक्षित गति से विकास नहीं किया। लेकिन वर्तमान गतिविधियों को देखकर यह कहा जा सकता है कि अब गीडा एक नए औद्योगिक चरण में प्रवेश कर रहा है।
करीब 1,200 औद्योगिक इकाइयों की दिशा में बढ़ता विस्तार, न्यू गोरखपुर का आवासीय विकास, संस्थागत क्षेत्र, प्लास्टिक पार्क, फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स और धुरियापार में प्रस्तावित विशाल औद्योगिक गलियारा—ये सभी संकेत बताते हैं कि गोरखपुर की औद्योगिक कहानी अब धीरे-धीरे बदल रही है।
नोएडा बनने में गीडा को शायद अभी लंबा समय लगे, लेकिन पूर्वांचल के लिए सवाल यह नहीं है कि वह आज नोएडा के बराबर है या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या वह पूर्वांचल के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और सम्मानजनक अवसर देने वाला मजबूत औद्योगिक केंद्र बन सकता है।
अगर आने वाले वर्षों में योजनाएं जमीन पर उतरती हैं और निवेश के साथ रोजगार भी पैदा होता है, तो गीडा पूर्वांचल के औद्योगिक पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
विश्लेषक की टिप्पणी
गोरखपुर में बदलाव की आहट दिखाई दे रही है। अब चुनौती यह है कि इस रफ्तार को लगातार बनाए रखा जाए और औद्योगिक निवेश को वास्तविक स्थानीय रोजगार में बदला जाए।
— हरश राज पाण्डेय
Political Analyst
Live India News24
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