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बाबूलाल मरांडी का घटता प्रभाव या बड़ी वापसी की तैयारी? झारखंड की आदिवासी राजनीति में क्या बदल रहा है

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झारखंड में बाबूलाल मरांडी की सियासत पर बड़ा सवाल क्या आदिवासी जनाधार खिसक रहा है? क्या हेमंत सोरेन बन गए हैं सबसे बड़ी चुनौती? वापसी की राह में कौन-कौन से सवाल विशेष मीडिया विश्लेषण Analyst: Harsh Raj Pandey Political Analyst | Editor-in-Chief – Live India News24 प्रस्तावना झारखंड की राजनीति में इस समय सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक सवालों में से एक यह है कि बाबूलाल मरांडी का प्रभाव किस दिशा में जा रहा है? झारखंड के पहले मुख्यमंत्री, भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता और वर्तमान में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी लंबे समय से राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण चेहरा रहे हैं। लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव ने झारखंड की राजनीतिक तस्वीर में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दिया। भाजपा राज्य में सत्ता से दूर रही और आदिवासी आरक्षित सीटों पर उसका प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। दूसरी तरफ हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाला झारखंड मुक्ति मोर्चा और उसके सहयोगी दल आदिवासी क्षेत्रों में मजबूत स्थिति बनाए रखने में सफल रहे। 2024 में 81 सदस्यीय विधानसभा में JMM-नेतृत्व वाले गठबंधन ने 56 सीटें हासिल...

“विश्वकर्मा पूजा विशेष: श्रम, हुनर और सृजन को नमन—हर कर्मयोगी के हाथों से बन रहा नए भारत का भविष्य”

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भगवान विश्वकर्मा पूजा विशेष: सृजन, श्रम और हुनर को नमन हर उस हाथ को सलाम, जो अपने हुनर से देश और समाज का निर्माण करता है विशेष ब्लॉग | Analyst: Harsh Raj Pandey Political Analyst | Editor-in-Chief – Live India News24 भारत की सनातन परंपरा में हर पर्व अपने साथ एक विशेष संदेश लेकर आता है। भगवान विश्वकर्मा पूजा भी ऐसा ही पर्व है, जो केवल धार्मिक आस्था का अवसर नहीं, बल्कि श्रम, कौशल, निर्माण, तकनीक और कर्म के सम्मान का प्रतीक है। भगवान विश्वकर्मा को भारतीय परंपरा में दिव्य शिल्पकार और निर्माण-कला के अधिष्ठाता के रूप में माना जाता है। विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर कारीगर, इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ, श्रमिक, उद्योगपति, व्यापारी और निर्माण कार्य से जुड़े लोग अपने औजारों, मशीनों और कार्यस्थल की पूजा करते हैं। लेकिन इस पर्व का महत्व इससे कहीं आगे है। श्रम ही निर्माण की पहली सीढ़ी है हम जब किसी खूबसूरत इमारत को देखते हैं तो अक्सर उसकी सुंदरता देखते हैं, लेकिन उसके पीछे लगे हजारों हाथों की मेहनत दिखाई नहीं देती। किसी सड़क के निर्माण में मजदूर का पसीना, इंजीनियर की योजना, मशीन ऑप...

“वडनगर से प्रधानमंत्री आवास तक: नरेंद्र मोदी की 76वीं वर्षगांठ पर संघर्ष, संगठन और नेतृत्व की अनकही यात्रा”

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नरेंद्र मोदी का जन्मदिन: संघर्ष से शिखर तक की यात्रा चाय की दुकान से प्रधानमंत्री कार्यालय तक—एक ऐसे राजनीतिक सफर का विश्लेषण जिसने भारतीय राजनीति की दिशा बदली विशेष जन्मदिन विश्लेषण रिपोर्ट विश्लेषक: Harsh Raj Pandey Political Analyst | Editor-in-Chief, Live India News24 17 सितंबर: एक जन्मदिन, जो एक राजनीतिक यात्रा की कहानी भी है 17 सितंबर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। साल 1950 में गुजरात के वडनगर में जन्मे नरेंद्र मोदी आज भारतीय राजनीति के सबसे प्रमुख सार्वजनिक चेहरों में से एक हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, उनका बचपन साधारण आर्थिक परिस्थितियों में बीता और परिवार की मदद के लिए उन्होंने छोटी उम्र में चाय की दुकान पर भी काम किया। आगे चलकर यही जीवन अनुभव उनके सार्वजनिक जीवन की एक महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि बना। लेकिन नरेंद्र मोदी की कहानी केवल सत्ता के सर्वोच्च पद तक पहुंचने की कहानी नहीं है। इसे तीन अलग-अलग चरणों में समझा जा सकता है— संघर्ष → संगठन → शासन और यही इस राजनीतिक यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण विश्लेषणात्मक पक्ष है। ...

“6 साल बाद फिर खुला सुशांत सिंह राजपूत केस का राज़? दिशा सालियान मामले में CBI की नई जांच से उठे बड़े सवाल”

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📰 सुशांत सिंह राजपूत केस: 6 साल बाद फिर खुला रहस्य? दिशा सालियान मामले में CBI की FIR से बढ़ी हलचल, अब सामने आएंगे 8 जून 2020 की रात के जवाब विशेष मीडिया विश्लेषण | Analyst: Harsh Raj Pandey Live India News24 नई दिल्ली/मुंबई | 16 सितंबर 2026 सुशांत सिंह राजपूत की मौत को छह साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन जून 2020 की वे दो घटनाएं एक बार फिर चर्चा में हैं। वजह है—सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत की CBI द्वारा शुरू की गई नई जांच । 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान की मौत की परिस्थितियों की CBI जांच का आदेश दिया। अदालत ने शुरुआती जांच में कई गंभीर विसंगतियों का उल्लेख किया और कहा कि पिछली जांच ने जवाबों से अधिक सवाल खड़े किए। हालांकि अदालत ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि पर्याप्त सामग्री के बिना किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाना चाहिए। इसके बाद CBI ने सितंबर 2026 में FIR दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू कर दी। 🔴 सबसे बड़ा सवाल—अब जांच किस दिशा में जाएगी? दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को हुई थी। इसके कुछ ही दिनों बाद, 14 जून 2020 को सुशांत स...

👉 “2024 का झटका या 2027 का संकेत? उत्तर प्रदेश में BJP की अगली परीक्षा”

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क्या उत्तर प्रदेश में BJP का क्रेज खत्म हो रहा है? 2027 से पहले बदलते राजनीतिक समीकरणों की पड़ताल Analyst: Harsh Raj Pandey उत्तर प्रदेश की राजनीति इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां 2027 का विधानसभा चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन या सत्ता की वापसी का चुनाव नहीं रह गया है। यह चुनाव यह भी तय करेगा कि पिछले एक दशक में उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भारतीय जनता पार्टी ने जो मजबूत पकड़ बनाई थी, वह आगे भी कायम रहती है या प्रदेश में राजनीतिक समीकरण एक बार फिर बड़े स्तर पर बदलते हैं। पिछले कुछ वर्षों में BJP ने उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति का एक मजबूत मॉडल खड़ा किया। नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, योगी आदित्यनाथ की प्रशासनिक छवि, हिंदुत्व का मुद्दा, संगठन की ताकत और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का आधार—इन सभी ने मिलकर पार्टी को लगातार चुनावी सफलता दिलाई। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव ने इस तस्वीर में महत्वपूर्ण बदलाव दिखाया। इसलिए आज सवाल यह नहीं है कि “क्या BJP खत्म हो रही है?” असल सवाल यह है— क्या BJP का वह राजनीतिक दबदबा कमजोर पड़ रहा है, जिसने उसे लंबे समय तक उत्तर प्रद...

🇮🇳 “नई दिल्ली से नई विश्व व्यवस्था की दस्तक: BRICS में भारत का बढ़ता दबदबा और बदलता वैश्विक शक्ति-संतुलन”

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🇮🇳 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 नई दिल्ली से बदली वैश्विक कूटनीति की दिशा, भारत की बढ़ी भूमिका विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट स्थान: नई दिल्ली तिथि: 12–13 सितंबर 2026 आयोजक देश: भारत मुख्य दस्तावेज: नई दिल्ली घोषणा विश्लेषक: हर्ष राज पांडेय लाइव इंडिया न्यूज़24 प्रस्तावना नई दिल्ली में आयोजित 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन केवल 11 देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों की बैठक नहीं था, बल्कि यह बदलती हुई विश्व व्यवस्था में भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका और वैश्विक दक्षिण की बदलती ताकत का महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में सदस्य देशों ने 140 बिंदुओं वाली नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से स्वीकार किया। अलग-अलग राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक हित रखने वाले देशों को एक साझा दस्तावेज पर सहमत कराना भारत की कूटनीतिक क्षमता की महत्वपूर्ण परीक्षा थी। इस सम्मेलन में आतंकवाद, पश्चिम एशिया, फिलिस्तीन, रूस-यूक्रेन संघर्ष, वैश्विक व्यापार, डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कृषि, स्वास्थ्य, ज...

“गणेश चतुर्थी: आस्था से जागरूकता तक, गणपति बप्पा का बड़ा संदेश”

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🕉️ गणेश चतुर्थी विशेष मीडिया रिपोर्ट आस्था के साथ जागरूकता का संकल्प — गणपति उत्सव हमें क्या संदेश देता है? विशेष विश्लेषण | Live India News24 आज देशभर में भगवान श्री गणेश की आराधना के साथ गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और देश के विभिन्न हिस्सों तक घरों, मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति की स्थापना की जा रही है। गणेश चतुर्थी भारतीय संस्कृति के उन पर्वों में से है, जहां धर्म, आस्था, संस्कृति, सामाजिक एकता और सामूहिक सहभागिता एक साथ दिखाई देती है। लेकिन बदलते समय के साथ इस पर्व का एक महत्वपूर्ण पक्ष और सामने आता है— क्या हमारी आस्था के साथ हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ रही है? यही सवाल आज समाज के सामने विचार का विषय है। 🌺 भगवान गणेश की आराधना का वास्तविक संदेश भगवान श्री गणेश को बुद्धि, विवेक, ज्ञान और शुभारंभ के देवता के रूप में पूजा जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी का स्मरण करने की परंपरा भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही है। गणेश जी का स्वरूप स्वयं अनेक प्रतीकात्म...