“यूपी में खटाखट तबादले, फिर लखनऊ के ‘खास’ थानेदार क्यों बेदाग? आखिर किसकी मेहरबानी!”
यूपी में खटाखट तबादलों के बीच लखनऊ में जमे ‘खास’ थानेदार, आखिर इन पर कौन मेहरबान?
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक कसावट और कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार आईपीएस अधिकारियों से लेकर थाना प्रभारियों तक के तबादले किए जा रहे हैं। कई जिलों में कप्तान बदले गए हैं और पुलिस कमिश्नरेट स्तर पर भी फेरबदल देखने को मिला है। ऐसे में राजधानी लखनऊ के कुछ थानों में लंबे समय से जमे पुलिसकर्मियों की तैनाती को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
चर्चा है कि लखनऊ के कुछ थानों में ऐसे थाना प्रभारी, दरोगा, मुंशी और अन्य पुलिसकर्मी लंबे समय से तैनात हैं। कुछ कर्मियों के बारे में स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जा रहा है कि वे वर्षों से एक ही थाने या आसपास के सर्किल में अपनी तैनाती बनाए हुए हैं।
तबादलों के बीच क्यों नहीं बदली इनकी कुर्सी?
जब शासन और पुलिस विभाग की ओर से समय-समय पर स्थानांतरण और तैनाती में बदलाव किए जाते हैं, तो लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे पुलिसकर्मियों को लेकर स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि आखिर इन मामलों में विभागीय स्तर पर क्या नीति अपनाई जा रही है।
स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि यदि किसी कर्मचारी की तैनाती निर्धारित अवधि से अधिक समय से है, तो उसके स्थानांतरण की समीक्षा क्यों नहीं हो रही है?
पारदर्शिता पर सवाल
किसी भी पुलिसकर्मी की लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में तैनाती को लेकर सबसे बड़ा सवाल पारदर्शिता और निष्पक्षता का होता है। लंबे समय तक एक ही स्थान पर रहने से स्थानीय स्तर पर प्रभाव और संबंध विकसित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि, यह भी जरूरी है कि किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि संबंधित विभागीय रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच के आधार पर ही की जाए।
क्या होगा उच्चाधिकारियों का अगला कदम?
अब सवाल यह है कि क्या लखनऊ पुलिस के उच्चाधिकारी लंबे समय से तैनात पुलिसकर्मियों की सूची और उनकी पोस्टिंग अवधि की समीक्षा करेंगे? क्या यह देखा जाएगा कि कौन-कौन से कर्मचारी निर्धारित अवधि से अधिक समय से एक ही थाना, सर्किल या क्षेत्र में तैनात हैं?
राजधानी में तबादलों की तेज रफ्तार के बीच यदि कुछ चुनिंदा पुलिसकर्मी लगातार अपनी कुर्सी बचाए हुए हैं, तो इसकी वजह स्पष्ट होना जरूरी है।
फिलहाल सवाल जनता के बीच है—आखिर इन ‘खास’ थानेदारों और पुलिसकर्मियों पर किसकी मेहरबानी है?
Analyst: Harsh Raj Pandey
Editor-in-Chief, Live India News24
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