"प्रसूता और नवजात की मौत: शव के लिए पति ने बेचे जेवर, अस्पताल को चुकाए ₹1 लाख”

प्रसूता और नवजात की मौत के बाद अस्पताल पर गंभीर आरोप

शव लेने के लिए पति ने जेवर बेचकर चुकाए ₹1 लाख, परिजनों ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप

बाराबंकी/लखनऊ संवाददाता | Live India News24

लखनऊ के कुर्सी रोड स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के बाद प्रसूता और नवजात की मौत का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। बाराबंकी के अलमापुर निवासी यशवंत कुमार रावत की 28 वर्षीय पत्नी सिंकी और उनके नवजात बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही और शव सौंपने के लिए बकाया रकम जमा कराने का गंभीर आरोप लगाया है।

परिजनों के अनुसार, प्रसव पीड़ा होने पर सिंकी को पहले मियांगंज स्थित क्वीनमेरी अस्पताल ले जाया गया। हालत बिगड़ने के बाद उन्हें कुम्हारमंडी स्थित क्वीनमेरी अस्पताल ले जाया गया। आरोप है कि इसी दौरान एम्बुलेंस से जुड़े कुछ लोगों/एजेंटों ने परिवार को कुर्सी रोड स्थित निजी मैनकाइंड अस्पताल में भर्ती कराने के लिए कहा।

अस्पताल में सिंकी का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के करीब 12 घंटे के भीतर नवजात की मौत हो गई। इसके बाद प्रसूता की हालत भी लगातार बिगड़ती गई और कथित रूप से उन्हें भारी रक्तस्राव होने लगा।

परिजनों का आरोप है कि गंभीर स्थिति के बावजूद समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल नहीं मिली। हालत बिगड़ने के बाद सिंकी ने भी दम तोड़ दिया।

शव सौंपने को लेकर भी गंभीर आरोप

मृतका के पति यशवंत कुमार रावत का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने बकाया भुगतान किए बिना शव सौंपने से इनकार कर दिया। परिवार के सामने आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो गई। आरोप है कि मजबूर होकर यशवंत कुमार को अपने जेवर बेचकर करीब ₹1 लाख की व्यवस्था करनी पड़ी, जिसके बाद शव उन्हें सौंपा गया।

सबसे दर्दनाक स्थिति यह है कि परिवार का दूसरा नवजात भी गंभीर हालत में अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी अस्पतालों तक मरीजों की सुरक्षा, रेफरल व्यवस्था, एम्बुलेंस दलालों की कथित सक्रियता और इलाज के दौरान पारदर्शिता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यदि परिजनों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल चिकित्सा लापरवाही का मामला नहीं बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के साथ संवेदनहीन व्यवहार का भी गंभीर उदाहरण हो सकता है।

अब सवाल यह है कि प्रसूता और नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई? क्या इलाज के दौरान निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था? क्या अस्पताल में उस समय विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध थे? और क्या शव सौंपने के लिए भुगतान की शर्त रखी गई थी?

इन सभी सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

Live India News24 इस मामले में संबंधित अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।

रिपोर्टिंग एवं प्रस्तुति

Harsh Raj Pandey
Editor-in-Chief – Live India News24
National Chief General Secretary – All India Journalists Association
National Media Incharge – Indian Farmer Union

विशेष टिप्पणी: इस रिपोर्ट में लगाए गए आरोप पीड़ित परिवार के कथित बयान/आरोपों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और अस्पताल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

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