कुर्बानी नहीं, करुणा का भी त्योहार है ईद
ईद-उल-अधा और बेजुबानों के प्रति हमारी जिम्मेदारी
कुर्बानी के साथ इंसानियत और रहमत का भी संदेश
ईद-उल-अधा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि त्याग, इंसानियत, करुणा और अल्लाह की राह में समर्पण का प्रतीक है। यह दिन हमें हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की उस अटूट आस्था की याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने अल्लाह के हुक्म के आगे अपनी सबसे प्रिय चीज़ को भी कुर्बान करने का जज़्बा दिखाया।
लेकिन आज के दौर में हमें यह भी समझने की आवश्यकता है कि इस पावन अवसर का असली संदेश सिर्फ कुर्बानी तक सीमित नहीं है, बल्कि हर जीव के प्रति दया, प्रेम और जिम्मेदारी भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस्लाम में जानवरों के प्रति दया का महत्व
इस्लाम एक ऐसा मजहब है जो हर मखलूक पर रहमत और इंसाफ का संदेश देता है। हदीसों में कई बार यह बताया गया है कि जो इंसान बेजुबान जानवरों पर दया करता है, अल्लाह उस पर अपनी रहमत बरसाता है।
जानवर भी अल्लाह की बनाई हुई मखलूक हैं। उन्हें दर्द होता है, भूख लगती है, प्यास लगती है और वे भी प्यार व सुरक्षा चाहते हैं। ईद-उल-अधा के मौके पर हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी जानवर के साथ क्रूरता, अत्याचार या अमानवीय व्यवहार न हो।
कुर्बानी का असली अर्थ
कुर्बानी केवल एक रस्म नहीं, बल्कि अपने अंदर के अहंकार, लालच और कठोरता को खत्म करने का संदेश है। यदि हमारे व्यवहार से किसी बेजुबान को अनावश्यक पीड़ा पहुँचती है, तो हमें अपने तौर-तरीकों पर पुनर्विचार करना चाहिए।
इस अवसर पर हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि:
- जानवरों के साथ प्रेम और नरमी से व्यवहार किया जाए।
- उन्हें भूखा-प्यासा न रखा जाए।
- बच्चों के सामने क्रूर दृश्य न हों।
- साफ-सफाई और इंसानियत का विशेष ध्यान रखा जाए।
- जरूरतमंदों और गरीबों तक कुर्बानी का हिस्सा सम्मानपूर्वक पहुँचाया जाए।
रहमत और मोहब्बत का पैगाम
आज समाज में नफरत और संवेदनहीनता बढ़ती जा रही है। ऐसे समय में ईद हमें इंसानियत, भाईचारे और दया का रास्ता दिखाती है। यदि हम अपने दिल में बेजुबानों के लिए रहम पैदा कर लें, तो यही इस त्योहार की सबसे बड़ी खूबसूरती होगी।
एक प्यासे जानवर को पानी पिलाना, घायल पशु की मदद करना, या किसी बेजुबान को दुत्कारने के बजाय उसे अपनापन देना — यही असली इंसानियत है।
समाज के नाम एक संदेश
आइए, इस ईद-उल-अधा पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि:
“हम सिर्फ इंसानों के लिए नहीं, बल्कि हर बेजुबान जीव के लिए भी दया, प्रेम और सम्मान का भाव रखेंगे।”
ईद का असली संदेश मोहब्बत, रहमत और इंसानियत है।
अगर हमारे कारण किसी बेजुबान की आँख में डर के बजाय सुकून दिखे, तो समझिए हमारी ईद सच में मुकम्मल हो गई।
ईद मुबारक
— हर्ष राज पाण्डेय
(National Chief General Secretary - All India Journalist Association)
(Editor in Chief - Live India News 24)
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